भारतीय दर्शन (Indian Philosophy) के आस्तिक (षड्-दर्शन) और नास्तिक संप्रदायों से संबंधित ये 100 वन-लाइनर प्रश्नोत्तरआपकी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक व्यापक संसाधन हैं:
Q1. भारतीय दर्शन को मुख्य रूप से किन दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है? – आस्तिक और नास्तिक
Q2. ‘आस्तिक’ दर्शन का क्या अर्थ है? – वे दर्शन जो वेदों की प्रामाणिकता को स्वीकार करते हैं
Q3. ‘नास्तिक’ दर्शन का क्या अर्थ है? – वे दर्शन जो वेदों की सत्ता को स्वीकार नहीं करते
Q4. आस्तिक दर्शन के अंतर्गत आने वाले छह दर्शनों को क्या कहा जाता है? – षड्-दर्शन (Shad-darshana)
Q5. सांख्य दर्शन (Samkhya Philosophy) के प्रतिपादक कौन थे? – महर्षि कपिल
Q6. योग दर्शन (Yoga Philosophy) के संस्थापक किसे माना जाता है? – महर्षि पतंजलि
Q7. न्याय दर्शन (Nyaya Philosophy) के प्रवर्तक कौन थे? – महर्षि गौतम (अक्षपाद गौतम)
Q8. वैशेषिक दर्शन (Vaisheshika Philosophy) के संस्थापक कौन थे? – महर्षि कणाद (उलूक)
Q9. पूर्व मीमांसा (Mimamsa) के प्रतिपादक कौन थे? – महर्षि जैमिनी
Q10. उत्तर मीमांसा या वेदांत (Vedanta) के प्रवर्तक कौन थे? – बादरायण (महर्षि व्यास)
Q11. ‘सांख्य सूत्र’ किस दर्शन का मूल ग्रंथ है? – सांख्य दर्शन
Q12. सांख्य दर्शन के अनुसार सृष्टि का निर्माण किन दो तत्वों से हुआ है? – पुरूष और प्रकृति
Q13. सांख्य दर्शन कितने तत्वों को स्वीकार करता है? – 25 तत्व
Q14. योग दर्शन का मूल ग्रंथ कौन सा है? – योग सूत्र
Q15. पतंजलि के अनुसार योग की परिभाषा क्या है? – योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः (चित्त की वृत्तियों का निरोध)
Q16. योग दर्शन में ‘अष्टांग योग’ के कितने चरण हैं? – आठ (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि)
Q17. न्याय दर्शन मुख्य रूप से किस पर आधारित है? – तर्कशास्त्र और ज्ञानमीमांसा (Logic and Epistemology)
Q18. न्याय दर्शन के अनुसार ज्ञान के कितने प्रमाण (Pramanas) हैं? – चार (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द)
Q19. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ब्रह्मांड का मूल आधार क्या है? – परमाणु (Atom)
Q20. ‘परमाणुवाद’ का सिद्धांत सबसे पहले किस भारतीय दर्शन ने दिया? – वैशेषिक दर्शन
Q21. पूर्व मीमांसा दर्शन का मुख्य बल किस पर है? – कर्मकांड और धर्म (Dharma)
Q22. वेदांत का शाब्दिक अर्थ क्या है? – वेदों का अंत (उपनिषद)
Q23. ‘ब्रह्म सूत्र’ की रचना किसने की थी? – बादरायण
Q24. अद्वैत वेदांत (Advaita Vedanta) के सबसे प्रमुख प्रतिपादक कौन थे? – आदि शंकराचार्य
Q25. ‘अहं ब्रह्मास्मि’ किस दर्शन का मुख्य महावाक्य है? – अद्वैत वेदांत
Q26. विशिष्टाद्वैत (Vishishtadvaita) मत के प्रवर्तक कौन थे? – रामअनुजाचार्य
Q27. द्वैतवाद (Dvaita) दर्शन के संस्थापक कौन थे? – मध्वाचार्य
Q28. द्वैताद्वैत (Dvaitadvaita) मत के प्रवर्तक कौन थे? – निम्बार्काचार्य
Q29. शुद्धाद्वैत (Shuddhadvaita) मत के प्रवर्तक कौन थे? – वल्लभाचार्य
Q30. चारवाक दर्शन (Charvaka) किस श्रेणी में आता है? – नास्तिक दर्शन
Q31. चारवाक दर्शन को और किस नाम से जाना जाता है? – लोकायत दर्शन
Q32. चारवाक दर्शन के अनुसार ज्ञान का एकमात्र प्रमाण क्या है? – प्रत्यक्ष (Perception)
Q33. “जब तक जियो सुख से जियो, चाहे ऋण लेकर घी पियो” किस दर्शन का सिद्धांत है? – चारवाक
Q34. चारवाक दर्शन के अनुसार ‘मोक्ष’ क्या है? – मृत्यु ही मोक्ष है
Q35. बौद्ध दर्शन (Buddhist Philosophy) के संस्थापक कौन थे? – गौतम बुद्ध
Q36. बौद्ध दर्शन के अनुसार ‘चार आर्य सत्य’ क्या हैं? – दुःख, दुःख समुदाय, दुःख निरोध, दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा
Q37. बुद्ध द्वारा बताए गए दुखों से मुक्ति के मार्ग को क्या कहते हैं? – अष्टांगिक मार्ग
Q38. बौद्ध दर्शन का ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ सिद्धांत क्या है? – कारण-कार्य का सिद्धांत (Cause and Effect)
Q39. बौद्ध धर्म की ‘क्षणिकवाद’ अवधारणा क्या है? – संसार की हर वस्तु निरंतर परिवर्तनशील है
Q40. जैन दर्शन (Jain Philosophy) के अनुसार ‘अनेकांतवाद’ क्या है? – सत्य के कई पहलू हो सकते हैं (सापेक्षता)
Q41. जैन दर्शन का ‘स्याद्वाद’ सिद्धांत किससे संबंधित है? – ज्ञान की आंशिक प्रामाणिकता से
Q42. जैन धर्म के अनुसार ‘पंच महाव्रत’ क्या हैं? – अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य
Q43. जैन दर्शन में ‘त्रिरत्न’ क्या हैं? – सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र
Q44. शून्यवाद (Madhyamaka) स्कूल के संस्थापक कौन थे? – नागार्जुन
Q45. ‘योगाचार’ या विज्ञानवाद बौद्ध दर्शन की किस शाखा से संबंधित है? – महायान
Q46. सांख्य दर्शन ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करता है? – नहीं (मूल सांख्य अनीश्वरवादी है)
Q47. योग दर्शन और सांख्य दर्शन में मुख्य अंतर क्या है? – योग दर्शन ‘ईश्वर’ को एक विशेष पुरुष के रूप में स्वीकार करता है
Q48. न्याय सूत्र के भाष्यकार कौन थे? – वात्स्यायन
Q49. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘पदार्थ’ (Categories) की संख्या कितनी है? – सात
Q50. ‘अर्थापत्ति’ और ‘अनुपलब्धि’ प्रमाणों को कौन सा दर्शन स्वीकार करता है? – पूर्व मीमांसा (विशेषकर भट्ट मत)
Q51. आदि शंकराचार्य के अनुसार ‘जगत’ का स्वरूप क्या है? – माया (Mithya/Illusion)
Q52. ‘तत्वमसि’ का क्या अर्थ है? – वह (ब्रह्म) तुम ही हो
Q53. सांख्य दर्शन के अनुसार ‘दुःख’ के तीन प्रकार कौन से हैं? – आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक
Q54. न्याय दर्शन के अनुसार ‘अनुमान’ (Inference) के कितने अवयव हैं? – पाँच (प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहरण, उपनय, निगमन)
Q55. ‘अविद्या’ का नाश ही मोक्ष है, यह किस दर्शन का विचार है? – वेदांत
Q56. जैन दर्शन के अनुसार ‘जीव’ और ‘अजीव’ क्या हैं? – चेतन और जड़ तत्व
Q57. ‘कैवल्य’ की प्राप्ति किस दर्शन का मुख्य लक्ष्य है? – जैन दर्शन और योग दर्शन (अलग संदर्भों में)
Q58. बौद्ध दर्शन का ‘निर्वाण’ क्या है? – तृष्णा का अंत और शांति की प्राप्ति
Q59. चारवाक दर्शन के अनुसार ब्रह्मांड किन चार तत्वों से बना है? – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु (आकाश को वे स्वीकार नहीं करते)
Q60. ‘साधना पाद’ योग सूत्र का कौन सा भाग है? – दूसरा भाग
Q61. न्याय दर्शन में ‘व्याप्ति’ क्या है? – हेतु और साध्य के बीच का अविनाभावी संबंध
Q62. वैशेषिक दर्शन में ‘विशेष’ का क्या अर्थ है? – परमाणुओं का वह गुण जो उन्हें एक-दूसरे से अलग करता है
Q63. ‘विभ्रंश’ या भ्रम का सिद्धांत किस दर्शन में ‘ख्यातिवाद’ कहलाता है? – मीमांसा और वेदांत
Q64. सांख्य दर्शन में ‘सत्कार्यवाद’ क्या है? – कार्य अपनी उत्पत्ति से पूर्व कारण में विद्यमान रहता है
Q65. बौद्ध दर्शन की किस शाखा को ‘शून्यवाद’ कहा जाता है? – माध्यमिक शाखा
Q66. जैन दर्शन में ‘संवर’ का क्या अर्थ है? – कर्मों के प्रवाह को रोकना
Q67. जैन दर्शन में ‘निर्जरा’ का क्या अर्थ है? – संचित कर्मों का क्षय होना
Q68. ‘पुद्गल’ शब्द का प्रयोग किस दर्शन में जड़ तत्व (Matter) के लिए होता है? – जैन दर्शन
Q69. न्याय दर्शन के अनुसार ‘आत्मा’ क्या है? – एक द्रव्य जिसमें चेतना एक आगंतुक गुण है
Q70. अद्वैत वेदांत के अनुसार ‘ब्रह्म’ का लक्षण क्या है? – सत्यं ज्ञानमनंतं ब्रह्म (या सत्-चित्-आनंद)
Q71. योग दर्शन में ‘क्लेश’ कितने प्रकार के होते हैं? – पाँच (अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश)
Q72. ‘प्रकृति’ के तीन गुण कौन से हैं? – सत्व, रजस और तमस
Q73. सांख्य दर्शन के अनुसार मोक्ष की अवस्था क्या है? – विवेक ज्ञान (पुरूष और प्रकृति का भेद जानना)
Q74. न्याय दर्शन में ‘प्रमेय’ का क्या अर्थ है? – ज्ञान का विषय (Object of Knowledge)
Q75. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘अभाव’ क्या है? – किसी वस्तु की अनुपस्थिति (सातवां पदार्थ)
Q76. पूर्व मीमांसा दर्शन के अनुसार वेदों की प्रकृति क्या है? – अपौरुषेय (मनुष्य द्वारा रचित नहीं)
Q77. ‘मायावाद’ का खंडन किस वेदांती दार्शनिक ने सबसे प्रबलता से किया? – रामअनुजाचार्य
Q78. ‘पुष्टि मार्ग’ का संबंध किस दर्शन से है? – शुद्धाद्वैत (वल्लभाचार्य)
Q79. बौद्ध दर्शन में ‘त्रिपिटक’ क्या हैं? – सुत्तपिटक, विनयपिटक, अभिधम्मपिटक
Q80. ‘अहिंसा परमो धर्मः’ किस दर्शन का मूल मंत्र है? – जैन दर्शन
Q81. ‘सप्तभंगी नय’ किस दर्शन का हिस्सा है? – जैन दर्शन
Q82. सांख्य दर्शन में ‘प्रलय’ की अवस्था क्या है? – तीनों गुणों की साम्यावस्था
Q83. योग दर्शन में ‘ईश्वर’ को क्या माना गया है? – क्लेश-कर्म-विपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेषः (विशेष पुरुष)
Q84. न्याय दर्शन में ‘स्वार्थानुमान’ और ‘परार्थानुमान’ क्या हैं? – अनुमान के दो प्रकार
Q85. ‘शब्दानित्यता’ का सिद्धांत किस दर्शन का है? – वैशेषिक और न्याय (मीमांसा शब्द को नित्य मानती है)
Q86. ‘अपूर्व’ का सिद्धांत किस दर्शन से संबंधित है? – पूर्व मीमांसा (कर्म और फल के बीच की कड़ी)
Q87. ‘विवर्तवाद’ और ‘परिणामवाद’ में क्या अंतर है? – विवर्त (आभासी परिवर्तन), परिणाम (वास्तविक परिवर्तन)
Q88. आदि शंकराचार्य ने किन तीन ग्रंथों पर भाष्य लिखा जिन्हें ‘प्रस्थानत्रयी’ कहते हैं? – उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और भगवद्गीता
Q89. बौद्ध दर्शन में ‘शील, समाधि और प्रज्ञा’ क्या हैं? – साधना के तीन मुख्य स्तंभ
Q90. ‘जीवन्मुक्ति’ की अवधारणा को कौन सा दर्शन प्रमुखता से स्वीकार करता है? – अद्वैत वेदांत और सांख्य
Q91. ‘वैशेषिक सूत्र’ की रचना किसने की? – कणाद
Q92. न्याय दर्शन के अनुसार ‘हेत्वाभास’ क्या है? – तर्क में होने वाला दोष (Fallacy)
Q93. ‘अनेकांतवाद’ को ‘बौद्धिक अहिंसा’ क्यों कहा जाता है? – क्योंकि यह दूसरों के विचारों का सम्मान करना सिखाता है
Q94. सांख्य दर्शन के अनुसार ‘प्रकृति’ कैसी है? – जड़ और त्रिगुणात्मक
Q95. योग दर्शन के ‘यम’ के अंतर्गत क्या-क्या आता है? – अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह
Q96. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘समवाय’ क्या है? – दो वस्तुओं के बीच का नित्य संबंध (जैसे गुण और गुणी)
Q97. ‘धर्म’ शब्द का प्रयोग मीमांसा दर्शन में किसके लिए हुआ है? – वैदिक यज्ञों और कर्तव्यों के लिए
Q98. ‘चिदचिदविशिष्ट’ ब्रह्म की अवधारणा किसकी है? – रामअनुजाचार्य (विशिष्टाद्वैत)
Q99. चारवाक दर्शन के अनुसार ‘पुरुषार्थ’ क्या है? – काम (प्रमुख) और अर्थ (साधन के रूप में)
Q100. भारतीय दर्शन का अंतिम लक्ष्य क्या है? – दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति और मोक्ष की प्राप्ति